एक आशा थी मन में ,
एक मंजिल पाने की
एक मुकाम हासिल करने की
दिल की तमन्ना भी आ गई
उसका साथ देने, आशा का;
आशा मुस्कुराई :
बोली ,हंसी और फिर मुस्कुराई
तमन्ना कहने लगी
तमन्ना थी जीने की ,
मंजिल तक पहुंचने की
एक उजड़े हुए किरण की
फिर किरण आई
अब तमन्ना मुस्कुराई
हंसी गायी झूम उठी और फिर मुस्कुराई
फिर किरण बोली
आरजू है ,एक उजली सी किरण की लहर पाने की सफेद रोशनी पाने की
फिर किरण के साथ रोशनी आई
उजाला लेकर फिर बोली
हंसी गायी झूम उठी
अब रोशनी बोली
रोशन कर दू सारा जहां
मंजिल क्या चीज है ?
उसके भी आगे पहुंचा दूं तुम्हें
चलो मेरे साथ कहने लगी
उजली किरण के साथ
रोशनी भर दू जिंदगी में
मेरा साथ हमेशा देना
अब रोशनी चली
मंजिल की तरफ
उजयालो से भर के
अंधेरों को दूर करके
वो नाची गायी और मुस्कुराई
अब फिर से रोशनी बोली रोशन कर दू सारा जहां प्रकाश से
अंधेरों को चिरके बिखरा दू चांदनी को
चांदनी आई उसका साथ देने
बोली बहना मंजिल के पार है हम
हमसे क्या मुकाबला करोगी?
रोशनी बोली
मेरे ही किरणों से तू रोशनी बिखर रही है चांदनी बनकर उजली सी एक किरण बनकर
आशा की रोशन सी किरण बनकर
फिर किरण बोली मंजिलों से ऊंचा है कद मेरा
यह मंजिल क्या चीज है ?
सपने देखने ही है तो मेरे देखो
मेरे साथ चलो
फिर हंसी गायी बहुत मुस्कुराई
फिर चांदनी बोली चांद की छाया में सब कुछ सफेद सा है
जो रोशन भी है और किरणें भी बिखरती है
चांदनी की तो मति मारी गई
अब तो वह ज्यादा बोली आग बबूली
और हो गई पीली
फिर तो वहां किरण आई रोशन होकर
बोली ,हौसलों की उड़ान मंजिलों से ऊपर होती है
ऐसा बोली, फिर हंसी गायी
फिर बोली शांति शांति
अब फिर मुस्कुराई
अब तो शांति आई
सब को समेटकर साथ लेकर
मंजिल के ऊपर आयी
सपनों के ऊपर छाई
हंसी गाई और बहुत मुस्कुराई
और कहने लगी ;
आशा की किरण मंजिलों से भी ऊपर उड़ती है
उजाले की रोशनी चांदनी को भी प्रकाश देती है
और हौसलों की उडाने हिम्मत से ही उड़ान भरती है
अब आशा बोली
एक तमन्ना थी दिल में
किरण के साथ रोशन होकर जीने की
चांद की चांदनी बनकर
शांती से जीने की
अब सभी हंसी ,गाई और बहुत मुस्कुराई
एक मंजिल पाने की
एक मुकाम हासिल करने की
दिल की तमन्ना भी आ गई
उसका साथ देने, आशा का;
आशा मुस्कुराई :
बोली ,हंसी और फिर मुस्कुराई
तमन्ना कहने लगी
तमन्ना थी जीने की ,
मंजिल तक पहुंचने की
एक उजड़े हुए किरण की
फिर किरण आई
अब तमन्ना मुस्कुराई
हंसी गायी झूम उठी और फिर मुस्कुराई
फिर किरण बोली
आरजू है ,एक उजली सी किरण की लहर पाने की सफेद रोशनी पाने की
फिर किरण के साथ रोशनी आई
उजाला लेकर फिर बोली
हंसी गायी झूम उठी
अब रोशनी बोली
रोशन कर दू सारा जहां
मंजिल क्या चीज है ?
उसके भी आगे पहुंचा दूं तुम्हें
चलो मेरे साथ कहने लगी
उजली किरण के साथ
रोशनी भर दू जिंदगी में
मेरा साथ हमेशा देना
अब रोशनी चली
मंजिल की तरफ
उजयालो से भर के
अंधेरों को दूर करके
वो नाची गायी और मुस्कुराई
अब फिर से रोशनी बोली रोशन कर दू सारा जहां प्रकाश से
अंधेरों को चिरके बिखरा दू चांदनी को
चांदनी आई उसका साथ देने
बोली बहना मंजिल के पार है हम
हमसे क्या मुकाबला करोगी?
रोशनी बोली
मेरे ही किरणों से तू रोशनी बिखर रही है चांदनी बनकर उजली सी एक किरण बनकर
आशा की रोशन सी किरण बनकर
फिर किरण बोली मंजिलों से ऊंचा है कद मेरा
यह मंजिल क्या चीज है ?
सपने देखने ही है तो मेरे देखो
मेरे साथ चलो
फिर हंसी गायी बहुत मुस्कुराई
फिर चांदनी बोली चांद की छाया में सब कुछ सफेद सा है
जो रोशन भी है और किरणें भी बिखरती है
चांदनी की तो मति मारी गई
अब तो वह ज्यादा बोली आग बबूली
और हो गई पीली
फिर तो वहां किरण आई रोशन होकर
बोली ,हौसलों की उड़ान मंजिलों से ऊपर होती है
ऐसा बोली, फिर हंसी गायी
फिर बोली शांति शांति
अब फिर मुस्कुराई
अब तो शांति आई
सब को समेटकर साथ लेकर
मंजिल के ऊपर आयी
सपनों के ऊपर छाई
हंसी गाई और बहुत मुस्कुराई
और कहने लगी ;
आशा की किरण मंजिलों से भी ऊपर उड़ती है
उजाले की रोशनी चांदनी को भी प्रकाश देती है
और हौसलों की उडाने हिम्मत से ही उड़ान भरती है
अब आशा बोली
एक तमन्ना थी दिल में
किरण के साथ रोशन होकर जीने की
चांद की चांदनी बनकर
शांती से जीने की
अब सभी हंसी ,गाई और बहुत मुस्कुराई
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