माधुर्य

वाचा से भोली ।
वाणि से मधूर।
मधूरता मे  मधूर ।

सुंदरता मे सुंदर
गुणो मे भी गुणवान
अच्छाई मे भी अच्छी ।

 स्वर्ण जैसा तेज मुख पर छाया
हिरणी के सम ही काया
हंस जैसी हंसनी गोरी
मोर से भी मोरनी प्यारी।

निपुणता मे निपुण
एक स्वर्ग से उतरी अप्सरा
परंतु परमसंस्कारी
और उनसे भी निराली
सभी को मोहित करनेवाली।

संभवतः मेरे लिए ही बनी
एक ही बनी ऐसी ही बनी
 मै तो उसके मोह मे बंधा हुआ
मोहिनी तो बुलाता पर
मधूरता से भरी  माधुर्य

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