स्वर्ग जैसी धरती है । भारत माँ के आँगन में।

स्वर्ग जैसी धरती है ।
भारत माँ के आँगन में,
कटुता भी यही उभरती कश्मीर के कन कन में। 
राष्ट्रप्रेम तो यही मरा है, कश्मीर के मन मन में।
भारत देश का लहराए तिरंगा सारे भारतीयों के जनमन में ।

स्वर्ग जैसी धरती है भारत मां की आंगन में ।
जम्मू में तो आवाज नहीं ,लद्दाख में शांति है ।
पर कश्मीर की छाती पर आतंकियों के झंडे है।
और बगदाद जैसे नुमाइंदे है

दूर से दिखता सुंदर रंग इसका।
पर अंदर मैं तो  बेरंग है ।
सफेद चादर की धरती पर काली कलूटी छीट हैं ।

शिव का था कंठ विषैला  ।
इनका तो खून है विषैला ।
ऊपर से दिखते शैतान,
अंदर से तो हैवान है ।

पाक  से आते टुकड़े उठाने के ,
इनके तो सिर्फ धंधे है।
पाकी तो सिर्फ नाम से है ।
अंदर से सिर्फ गंदे हैं ।

पाकी कुछ नुमाइंदे है।
देश बिगाड़ने चलदे हैं।
खुद तो टूकडो पर निर्भर ।
दूसरों को मारे पत्थर।

 स्वर्ग जैसी धरती पर,
 दाग जैसे कुछ गंदे हैं।
 उन्हें उखाड़ने खड़े भारत मां के बंदे हैं।
            जय हिंद। जय भारत।
                             - nikhil kusale 

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