आयशा- एक अलग सी. ......?


एक समय था जब सारे व्यवसाय को में एक का ही राज चलता था वह था अशोक मेहता मेहता एंड मेहता कंपनी का मालिक जिसके पास ऐशा राम की कोई कमी नहीं थी संपत्ति तो इतनी थी कि वह राजा की तरह रहता था जैसे सच में कोई महाराजा हो वैसे हि थाट में रहता था
उसकी एक लड़की थी ,नाम था आयशा। जो ऊंचे पैलेस में रहा करती थी।वह इस समय किशोरावस्था से तरूणी बन चुकी थी। कुछ 18-20 की होगी शायद? पर उसके पास संपत्ति की कोई कमी नहीं थी ।खाना, पीना सब कुछ ऐश आराम की जिंदगी थी ।वह भी एक महारानी की तरह रहती थी ।उसकी मां नहीं थी।नौकरों ने उसकी देखभाल की बात तो कभी कभी देखा करता था बिजनेस से उसे समय नहीं मिलता था वह उसी बिजनेस के चक्कर में बाहर ही रहा करता था किसी शहरों में या वहां की होटलों में ।
1 दिन की बात है। आयशा पैलेस में घूम रही थी ।वही नौकर वही सब कुछ इसी से तो तंग आ चुकी थी। बचपन से इक्का-दुक्का फ्रेंड छोड़कर उसका कोई फ्रेंड नहीं था ।घर में सदा नौकरों में, या टीवी ,या गेम, या अकेली ही रूम में उदास बैठी रहा करती थी। ना खेलने के लिए कोई था ; ना अपने ख्याल बताने के लिए , ना ही बोलने के लिए। वह अंदर ही अंदर घूँट रही थी। कभी-कभी अचानक चलते चलते डर जाते थी । अचानक किसी को भी आसपास महसूस किया करती थी । उसे दीवारों में कोई भी नजर आता था। अंदर से उसके पैलेस के हर रूम का कलर व्हाइट था।दरवाजे भी थे। उस पैलेस की दीवारों पर कई सारे शिशे थे । कुछ इस तरह की उनके सामने जाते ही प्रतिमा और आप इनमें फर्क करना नामुमकिन हो जाता था ।दिमाग काम करना बंद कर देता था। पर एक बात खास थी रात को लाइट लगाते ही पैलेस रोशनी से जगमगा उठता था। जैसे किसी राजा का महल हो ,और उसमें किसी ने रंग ऊपर से फेंके हो । इस महल की जो बनावट थी कुछ अजीबो गरीब थी। जैसे कोई भूतिया घर ही हो। पर दिखने में कुछ ऐसा लगता नहीं था। परंतु अंदर से सन्नाटा होने के कारण किसी को भी अकेलापन खाने को दौड़ता था। पर आयशा की तो बात ही कुछ अलग थी ।
भाग - 2 https://kusalenikhil.blogspot.com/2018/06/blog-post_30.html?m=1
अचानक दरवाजे करहाने लगते हैं ।उसकी आवाज पैलेस में गूंजती रहती है। आयशा के रूम में खिड़कियां थी वह भी दो, जिसमें से अचानक हवा के झोंके आते रहते थे। अचानक एक झोंका आया और धड़ाम से शीशे का दरवाजा टूट कर बिखर गया ।आवाज इतनी हुई थी आयशा का दिल जोर से धक-धक धक-धक करने लगा ।आयशा के माथे से पसीना आ रहा था ।इतनी डरी हुई थी ।वहाँ अगर उसके कंधे पर कोई हाथ रखता तो वह सीधे स्वर्ग पहुंची होती ।इतनी डर गई थी आयशा। घबराहट में दरवाजे की कुंडी लगाती है।और खिड़की की तरफ जाती है ।खिड़की का जो बचा हुआ दरवाजा है ।उसे लगाती है ।और पर्दे को उसके ऊपर ओढती है। इसी तरह दूसरे खिड़की को भी डरते हुए वह दरवाजा बंद कर देती है ।और पर्दे को उसके ऊपर ओड़ती है।
तभी अचानक सन्नाटा इतना फैलता है कि कोई आदमी उस सन्नाटे में रहे तो उसकी रूह कांप जाए। पर आयशा उस सन्नाटे में थी ।वह भी अकेली। वह बिस्तर की तरफ जाने लगती है।
बिस्तर पर लेटी है लाइट ऑन ऑफ करती रहती है थोड़ी देर बाद उसे अकेलापन महसूस होने लगता है उसके बाद कुछ समय भी जाता है उसको दीवारों पर कुछ चित्र दिखने लगते हैं किसी नौकर का किसी की परछाई दिखती है माथे पर पसीना आता है चेहरे के भाव कुछ इस तरह बनते हैं कि यदि वहां सचमुच कोई हो तो उसे हार्ट अटैक आ जाए नौकर की प्रतिमा दिखने लगती है वह तार से उठकर खड़ी होती है दीवारों के पास जाने लगती है कौन है कौन है राम कोई है यहां पर कोई है कोई है क्या क्रोध और डर उसके अंदर बढ़ जाते हैं और जोर से चिल्लाती है ।
तभी अचानक जोर से कोई आवाज पैलेस में गूंजती रहती है ।नौकर वहां तुरंत आ जाते हैं ।जो नौकरानी है वहीं आती है ।क्या हुआ मैडम ? क्या हुआ ? कुछ तो कहो ?क्या हुआ ?तभी सभी उसकी तरफ कुछ हुआ है ऐसी निगाहों से देखते रहते हैं । तभी अचानक भयभीत हुए चेहरे पर डर के भाव तो थे पर अचानक मुख से स्वर निकलते हैं ।कौन था यहां ? मैं कहती हूं यहां आने से पहले कौन आया था यहां ?गुस्से से चिल्लाती है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह गुस्से से आग बबूला होती और नौकरों पर चिल्लाती रहती थी । नौकर उसको कुछ ऐसी निगाहों से देख रहे थे कि क्या हुआ होगा? मैडम ने हमको यहां कैसे देखा? हम तो यहां थे भी नहीं नौकर और नौकरानी या ऐसे विचारों में वहां से बाहर निकलते हैं। तभी आयशा विचारों में खोए हुए दरवाजे लगा कर बिस्तर की तरफ जाने लगती है ।नौकर सारे जा चुके थे। वह सोने के लिए कंबल उड़ती है ।थोड़ा सा साइड में रखा हुआ पानी पीती है ।पसीना पहुंचती है और चुपचाप सो जाती है।
दूसरे दिन सुबह उठती है । सब किया है कर लेती है ।और पहले अपनी सहेलियों को फोन लगा के उन्हें अपने पैलेस में आमंत्रित करती है ।उसकी सिर्फ दो ही सहेलियां थी। एक थी गीता और दूसरे की वृशाली । यह दोनों कभी कबार आयशा के पास आया करते थे ।रात को जो हुआ सब कुछ उनको आयशा बताती है ।तभी अचानक वह दोनों सीरियस होती है और आयशा को समझे नहीं लगती है ।कोई बात नहीं अकेलेपन के कारण ऐसा कभी-कभी होता है। ऐसी कोई वजह नहीं जिसे तू डिस्टर्ब हो और ऐसा कुछ हो जाए ।गीता और उषा ली पहले से ही सीरियस हो होती है ।पर बाद में नॉरमल की तरह बिहेव करती है ।क्योंकि उनकी जिंदगी में यह पहली घटना नहीं थी । इससे पहले भी तो यह सब होता था पर आयशा यह सब भूल जाती थी ।आयशा चुपचाप ईन सहेलियों की प्रतिक्रिया देख रही थी ।सहेलियां नॉरमल तो आयशा नॉर्मल हुई।
भाग - 1
एक समय था जब सारे व्यवसाय को में एक का ही राज चलता था वह था अशोक मेहता मेहता एंड मेहता कंपनी का मालिक जिसके पास ऐशा राम की कोई कमी नहीं थी संपत्ति तो इतनी थी कि वह राजा की तरह रहता था जैसे सच में कोई महाराजा हो वैसे हि थाट में रहता था
उसकी एक लड़की थी ,नाम था आयशा। जो ऊंचे पैलेस में रहा करती थी।वह इस समय किशोरावस्था से तरूणी बन चुकी थी। कुछ 18-20 की होगी शायद? पर उसके पास संपत्ति की कोई कमी नहीं थी ।खाना, पीना सब कुछ ऐश आराम की जिंदगी थी ।वह भी एक महारानी की तरह रहती थी ।उसकी मां नहीं थी।नौकरों ने उसकी देखभाल की बात तो कभी कभी देखा करता था बिजनेस से उसे समय नहीं मिलता था वह उसी बिजनेस के चक्कर में बाहर ही रहा करता था किसी शहरों में या वहां की होटलों में ।
1 दिन की बात है। आयशा पैलेस में घूम रही थी ।वही नौकर वही सब कुछ इसी से तो तंग आ चुकी थी। बचपन से इक्का-दुक्का फ्रेंड छोड़कर उसका कोई फ्रेंड नहीं था ।घर में सदा नौकरों में, या टीवी ,या गेम, या अकेली ही रूम में उदास बैठी रहा करती थी। ना खेलने के लिए कोई था ; ना अपने ख्याल बताने के लिए , ना ही बोलने के लिए। वह अंदर ही अंदर घूँट रही थी। कभी-कभी अचानक चलते चलते डर जाते थी । अचानक किसी को भी आसपास महसूस किया करती थी । उसे दीवारों में कोई भी नजर आता था। अंदर से उसके पैलेस के हर रूम का कलर व्हाइट था।दरवाजे भी थे। उस पैलेस की दीवारों पर कई सारे शिशे थे । कुछ इस तरह की उनके सामने जाते ही प्रतिमा और आप इनमें फर्क करना नामुमकिन हो जाता था ।दिमाग काम करना बंद कर देता था। पर एक बात खास थी रात को लाइट लगाते ही पैलेस रोशनी से जगमगा उठता था। जैसे किसी राजा का महल हो ,और उसमें किसी ने रंग ऊपर से फेंके हो । इस महल की जो बनावट थी कुछ अजीबो गरीब थी। जैसे कोई भूतिया घर ही हो। पर दिखने में कुछ ऐसा लगता नहीं था। परंतु अंदर से सन्नाटा होने के कारण किसी को भी अकेलापन खाने को दौड़ता था। पर आयशा की तो बात ही कुछ अलग थी ।
भाग - 2 https://kusalenikhil.blogspot.com/2018/06/blog-post_30.html?m=1
अचानक दरवाजे करहाने लगते हैं ।उसकी आवाज पैलेस में गूंजती रहती है। आयशा के रूम में खिड़कियां थी वह भी दो, जिसमें से अचानक हवा के झोंके आते रहते थे। अचानक एक झोंका आया और धड़ाम से शीशे का दरवाजा टूट कर बिखर गया ।आवाज इतनी हुई थी आयशा का दिल जोर से धक-धक धक-धक करने लगा ।आयशा के माथे से पसीना आ रहा था ।इतनी डरी हुई थी ।वहाँ अगर उसके कंधे पर कोई हाथ रखता तो वह सीधे स्वर्ग पहुंची होती ।इतनी डर गई थी आयशा। घबराहट में दरवाजे की कुंडी लगाती है।और खिड़की की तरफ जाती है ।खिड़की का जो बचा हुआ दरवाजा है ।उसे लगाती है ।और पर्दे को उसके ऊपर ओढती है। इसी तरह दूसरे खिड़की को भी डरते हुए वह दरवाजा बंद कर देती है ।और पर्दे को उसके ऊपर ओड़ती है।
तभी अचानक सन्नाटा इतना फैलता है कि कोई आदमी उस सन्नाटे में रहे तो उसकी रूह कांप जाए। पर आयशा उस सन्नाटे में थी ।वह भी अकेली। वह बिस्तर की तरफ जाने लगती है।
बिस्तर पर लेटी है लाइट ऑन ऑफ करती रहती है थोड़ी देर बाद उसे अकेलापन महसूस होने लगता है उसके बाद कुछ समय भी जाता है उसको दीवारों पर कुछ चित्र दिखने लगते हैं किसी नौकर का किसी की परछाई दिखती है माथे पर पसीना आता है चेहरे के भाव कुछ इस तरह बनते हैं कि यदि वहां सचमुच कोई हो तो उसे हार्ट अटैक आ जाए नौकर की प्रतिमा दिखने लगती है वह तार से उठकर खड़ी होती है दीवारों के पास जाने लगती है कौन है कौन है राम कोई है यहां पर कोई है कोई है क्या क्रोध और डर उसके अंदर बढ़ जाते हैं और जोर से चिल्लाती है ।
तभी अचानक जोर से कोई आवाज पैलेस में गूंजती रहती है ।नौकर वहां तुरंत आ जाते हैं ।जो नौकरानी है वहीं आती है ।क्या हुआ मैडम ? क्या हुआ ? कुछ तो कहो ?क्या हुआ ?तभी सभी उसकी तरफ कुछ हुआ है ऐसी निगाहों से देखते रहते हैं । तभी अचानक भयभीत हुए चेहरे पर डर के भाव तो थे पर अचानक मुख से स्वर निकलते हैं ।कौन था यहां ? मैं कहती हूं यहां आने से पहले कौन आया था यहां ?गुस्से से चिल्लाती है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह गुस्से से आग बबूला होती और नौकरों पर चिल्लाती रहती थी । नौकर उसको कुछ ऐसी निगाहों से देख रहे थे कि क्या हुआ होगा? मैडम ने हमको यहां कैसे देखा? हम तो यहां थे भी नहीं नौकर और नौकरानी या ऐसे विचारों में वहां से बाहर निकलते हैं। तभी आयशा विचारों में खोए हुए दरवाजे लगा कर बिस्तर की तरफ जाने लगती है ।नौकर सारे जा चुके थे। वह सोने के लिए कंबल उड़ती है ।थोड़ा सा साइड में रखा हुआ पानी पीती है ।पसीना पहुंचती है और चुपचाप सो जाती है।
दूसरे दिन सुबह उठती है । सब किया है कर लेती है ।और पहले अपनी सहेलियों को फोन लगा के उन्हें अपने पैलेस में आमंत्रित करती है ।उसकी सिर्फ दो ही सहेलियां थी। एक थी गीता और दूसरे की वृशाली । यह दोनों कभी कबार आयशा के पास आया करते थे ।रात को जो हुआ सब कुछ उनको आयशा बताती है ।तभी अचानक वह दोनों सीरियस होती है और आयशा को समझे नहीं लगती है ।कोई बात नहीं अकेलेपन के कारण ऐसा कभी-कभी होता है। ऐसी कोई वजह नहीं जिसे तू डिस्टर्ब हो और ऐसा कुछ हो जाए ।गीता और उषा ली पहले से ही सीरियस हो होती है ।पर बाद में नॉरमल की तरह बिहेव करती है ।क्योंकि उनकी जिंदगी में यह पहली घटना नहीं थी । इससे पहले भी तो यह सब होता था पर आयशा यह सब भूल जाती थी ।आयशा चुपचाप ईन सहेलियों की प्रतिक्रिया देख रही थी ।सहेलियां नॉरमल तो आयशा नॉर्मल हुई।
तो उसके बाद कुछ गप्पे सप्पे मार लिए और कुछ गेम्स हुए ।उससे ऐसा का उस दिन का अकेलापन दूर हुआ पर सहेलियां है कितने दिन तक रहेंगे और 2 दिन मस्ती करके अपने घर चली गई फिर से आयशा को अकेलापन महसूस होने लगा फिर से वही सपने वही डर नौकरों को दान दे छोड़ देना और वही पहले जैसा अकेलापन उसमें वह दिन-रात उसी के विचार में खोई रहती उसकी हालत अब कुछ खराब हो रही थी कभी-कभी अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता था कभी-कभी हाय पर हो जाती थी कभी दौरे पड़ते थे तभी उसके पापा अशोक मेहता को खबर की गई कि उनकी लड़की कुछ इन दिनों ठीक नहीं तो आप आकर उसे देखे संभाले अशोक मेहता के आने पर सारा वृत्तांत नौकरों ने उन्हें बताया अशोक मेहता ने अपनी बच्ची को डॉक्टर के पास लेने का प्रबंध किया डॉक्टर के पास चले गए उसे दिखाया।
डॉक्टर ने उसको कुछ मेडिसिन देखकर घर जाकर आराम करने के लिए कहा जब आयशा को हॉस्पिटल में लाया गया था तभी डॉक्टरों से सभी सलाम चोरों से पता चला की आयशा को इमैजिनेशन करने की कुछ ऐसी बीमारी है कि अगर अकेला छोड़ दिया गया तो वह कुछ भी कर सकती है उसकी जान को भी खतरा हो सकता है जो मेडिसिन दिया गया है उसे भी ना भूलें सुबह शाम देते रहेगा हर दिन लेने ही पड़ेंगे आपका काम है मिस्टर मेहता ऐसा कहकर डॉक्टर ने उन्हें समझाया मिस्टर मेहता ने नौकरों से कहा जो मेडिसिन है वह हर सुबह शाम आयशा को देनी ही है ऐसी डांट फटकार से उन्हें ताकि देकर
डॉक्टर ने उसको कुछ मेडिसिन देखकर घर जाकर आराम करने के लिए कहा जब आयशा को हॉस्पिटल में लाया गया था तभी डॉक्टरों से सभी सलाम चोरों से पता चला की आयशा को इमैजिनेशन करने की कुछ ऐसी बीमारी है कि अगर अकेला छोड़ दिया गया तो वह कुछ भी कर सकती है उसकी जान को भी खतरा हो सकता है जो मेडिसिन दिया गया है उसे भी ना भूलें सुबह शाम देते रहेगा हर दिन लेने ही पड़ेंगे आपका काम है मिस्टर मेहता ऐसा कहकर डॉक्टर ने उन्हें समझाया मिस्टर मेहता ने नौकरों से कहा जो मेडिसिन है वह हर सुबह शाम आयशा को देनी ही है ऐसी डांट फटकार से उन्हें ताकि देकर

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