परी


एक दिन आयी थी परी सबको हसाने ।
सबको सुख शांति के जाल मे फँसाने।
नाची गायी,
 बहुत मुस्कूरायी ।
लेकिन उसकी सुख -शांति रसे रबसे न देखी गई ।
पहली बार उसे देखकर कितनी खुशिया छायी ।
पहले से ही थी कितनी सतर्क ;
पर अब ये कैसी नौबत आयी।
आते समय सबके लिए ढेर सारी खुशिया लायी ।
पर जाते समय सारे संसार को गम दे गयी ।
आखिर सपनो से आयी थी परी।
फिर जहाँ के लिए सपना बन गयी।
आयी थी वो जो दो पल के लिए ,
फिर दो पलो मे जी जान से समायी ।
आयेगी कभी इस दूनिया मे दुबारा ।
स्वागत हो फिर से तुम्हारा ।
                                    -nikhil kusale

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