मेरे अच्छे विचार ......!

      मेरे अच्छे विचार ......!

चांद की रोशनी में चांदनी भी ऊभर आती है।
सुरज की किरणो से पाणी भी चमक उठता है ।
उसी तरह अच्छे विचारो की लहरों में पाप धूल जाता है।
       बुरे विचारो की ओर मनुष्य जल्दी खींच जाते है ।
       लेकिन अच्छे विचारो को कोई समजने तक हात तक              नही लगाता है ।
       कोई कहते है बुराई हजार बार दरवाजा खटखटाती है।
       लेकिन अच्छाई एक बार दरवाजा खटखटाकर निकल             जाती है ।
नदी को दूर दूर तक बह जाने से सागर मिल जाता है ।
 गंगा के पानी से नहाने से मनुष्य के पाप धूल जाते है  ।
उसी तरह बुरे कुकर्म वालो को अच्छे साथी जरूर मिलते है ।                इन नदी, सुरज और चांद की रोशनी मे खोए हुए                     लोगो को बताना चाहता हु कि ,
             जो आकर्षित करता है वही प्यार नही होता ।
             जो बुरा रास्ता दिखाता है वह सच्चा यार नही होता ।
             पीछे से किया जाने वाला कभी वार नही होता।
             कुकर्मो से पकने वाला अच्छा विचार नही होता।
                              -nikhil kusale 

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